स्टेट डेस्क/जबलपुर- छिंदवाड़ा जिले में कथित शराब माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में शिकायतकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता पूर्णिमा वर्मा के बयान बुधवार को लोकायुक्त कार्यालय, जबलपुर में दर्ज किए गए। लोकायुक्त द्वारा मामले में प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पूर्णिमा वर्मा, गुलाबी गैंग (मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़) की कमांडर तथा संपूर्ण महाराष्ट्र की प्रभारी ने छिंदवाड़ा के सिटी कोतवाली थाना प्रभारी आशीष धुर्वे और तहसीलदार आशुतोष रामटेक पर शराब माफिया से कथित मिलीभगत और आर्थिक लाभ लेकर अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए है, जिसकी शिकायत लोकयुक्त डीजी को की गई थी।

अवैध अहातों को संरक्षण का आरोप…
शिकायत में कहा गया है कि फव्वारा चौक, मानसरोवर, राज्यपाल चौक, कुम्हारी मोहल्ला और मिश्रा कॉलोनी क्षेत्रों में संचालित शराब दुकानों के साथ अवैध अहातों को संरक्षण दिया जा रहा है। आरोप है कि इन गतिविधियों के एवज में संबंधित अधिकारियों को प्रतिमाह मोटी रकम प्राप्त होती है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
पूर्णिमा वर्मा का कहना है कि वे लंबे समय से “नशा मुक्त छिंदवाड़ा” अभियान चला रही हैं और अवैध शराब बिक्री व अहातों के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। उनके अनुसार, इसी कारण उन्हें प्रशासनिक दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
प्रतिबंधात्मक धाराओं में कार्रवाई पर सवाल
शिकायतकर्ता ने अपने बयान में उल्लेख किया है कि दिनांक 31 अगस्त 2025 को उनके विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 170/126(बी), 135(3) के अंतर्गत रोजनामचा कायम कर उन्हें जेल भेजा गया। उनका आरोप है कि कथित घटना की तिथि और गिरफ्तारी की तिथि में विसंगति है—जहां घटना 31 अगस्त की बताई गई है, वहीं गिरफ्तारी 30 अगस्त की दर्शाई गई है।उन्होंने इसे सुनियोजित कार्रवाई बताते हुए कहा कि प्रतिबंधात्मक धाराओं का उपयोग दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया। सामान्यतः ऐसी धाराओं में परिस्थितियों के अनुसार कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा अन्य वैकल्पिक आदेश भी दिए जा सकते हैं, किंतु उन्हें जेल भेजा गया।
लोकायुक्त में प्रस्तुत दस्तावेज…
सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर में शिकायतकर्ता के विस्तृत कथन दर्ज किए गए तथा संबंधित दस्तावेज एवं अभिलेख भी प्रस्तुत किए गए। लोकायुक्त की प्रक्रिया के तहत प्रारंभिक जांच के बाद आवश्यक होने पर विस्तृत जांच अथवा प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा…
मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यदि आरोप प्रथम दृष्टया सत्य पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक आरोपित थाना प्रभारी और तहसीलदार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
सामाजिक संगठनों की नजर….
इस पूरे घटनाक्रम पर सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों की भी नजर है। नशामुक्ति अभियान और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच उत्पन्न इस विवाद ने जिले में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है।अब सबकी नजर लोकायुक्त की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच में शिकायत के तथ्य पुष्ट होते हैं तो यह मामला प्रदेश स्तर पर बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
KBP NEWS.IN
…जाहिद खान
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