स्टेट डेस्क/छिंदवाड़ा – हमारा देश विभिन्न धर्म,संस्कृति और सभ्यता का है।यहाँ प्रकृति और प्रतिमा दोनों की पूजा होती है।वैदिक संस्कृति प्रकृति की पूजा करता है तो श्रमण संस्कृति प्रतिमा की पूजा करती है। पूजा किसी की भी करो किंतु वात्सल्य भाव बना रहे यह ध्यान रखना होगा। परस्पर वात्सल्य होगा तो धर्म, संस्कृति और देश का विकास होगा। ज्ञानियों पुण्य के उदय से अनपढ़ भी मालिक बन जाता है और पाप के उदय में पढ़ा लिखा भी नौकरी करता है। जब तक पुण्य है तब तक अनुकूलता रहेगी। यह बात चर्या शिरोमणी आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर मोक्ष कल्याणक के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जीवन में कामना,वासना,भोग और काम चारों पर विजय प्राप्त करना वीरों का काम है। जिसने इस पर विजय प्राप्त कर लिया है वो महापुरुष बन गए। छिंदवाड़ा धर्म नगरी है यहाँ चार पंचकल्याणक में उपस्थित रहने का अवसर मिला।आप सभी धर्म के मार्ग में लगे रहकर आत्मकल्याण करें यही मंगल भावना है।

भगवान को हुआ मोक्ष…
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में सोमवार सुबह 6 बजे तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। वे कैलाश पर्वत से मोक्ष पधारे,जैसे ही भगवान को मोक्ष हुआ उपस्थित श्रावक श्राविकाओं ने जय जय किया। अग्निकुमार देवों ने आकर आगे की क्रियाएँ सम्पन्न कीं। विश्व शांति की मनोकामना के साथ मंगल महोत्सव की पूर्णता हुई।
जिनालय में विराजे भगवान…
मंगल महोत्सव के अंतिम दिन दोपहर 1 बजे आयोजन स्थल से शोभायात्रा निकली। आचार्य श्री के संघ सहित सानिध्य में प्रतिष्ठित भगवान को नवनिर्मित जिनालय अहिंसा हाइट में विराजमान किया गया। वहाँ से आचार्य संघ श्री शांतिनाथ चैत्यालय नागपुर रोड पहुँचा जहाँ पटौदी परिवार ने मंगल अगवानी की।समाधिस्थ मुनि श्री मृत्युंजय सागर जी महाराज के चरणों की स्थापना की गई।
आज छोटी बाज़ार में होगी धर्म सभा
आचार्य श्री संघ का विहार सुबह 7 बजे शांतिनाथ चैत्यालय से होगा। यहाँ से संघ छोटी बाज़ार पहुँचेगा जहाँ रामलीला रंगमंच पर धर्मसभा में आचार्य श्री के आशीष वचन सुनने मिलेंगे। तत्पश्चात आगे सिवनी की ओर मंगल विहार होगा।
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…जाहिद खान
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