स्टेड डेस्क– फिर Corona, फिर पाबंदियां, फिर कोशिशें, फिर कवायदें…! जिम्मेदारों ने नियम बना दिए, लागू कराने वालों ने मोर्चा सम्हाल लिया…! श्रीगणेश चौराहों से हुआ…! फिक्रमंद तैनात…! लुटेरों, चोरों, बलात्कारियों, भ्रष्टाचारियों, काला बाजारी करने वालों को पकड़ने के लिए इतने जतन नहीं होते होंगे, जितना प्रयास नाक पर दो इंच का कपड़ा चढ़वाने के लिए हो रहे हैं…! बैठक लगवाई से लेकर थाने ले जाई के नज़ारे बनने लगे हैं…! बेपरवाही की सजा सार्वजनिक जलालत के रूप में मिल रही है…!
बाजारों की तालाबंदी का समय तय हो गया है…! शराब दुकान के बंद होने का वक्त इसको मुंह चिढ़ाता नज़र आ रहा है…! बनाए गए नियम हास्य के हालात बना रहे हैं…! सोने के समय से लेकर जागने के वक्त तक Corona के शहर में रहने के कयास लगाए गए हैं…! सारा दिन संक्रमण सुकून से आराम करता रहेगा…! न बाज़ार की भीड़ को छेड़ेगा, न दफ्तरों की चौखट चढ़ेगा, न सियासी की तरफ फटकेगा और न किसी राजनीतिक कार्यक्रम में पहुंचेगा…!
बढ़ते मरीज आंकड़े कोताही, बेपरवाही, अनदेखी की तरफ इशारे कर रहे हैं… Corona को दी गई छुट्टी और मनमानी करने की चुगली कर रहे हैं…! ज़िम्मेदार बेशर्मी से इसको झुठलाने पर भी आमादा हैं, ठीठाई पर भी अग्रसर…! अब कोशिशों से संक्रमण रोकने के दावे उछल रहे हैं…!
रात से सुबह तक की पाबंदी आगे बढ़कर सप्ताह में कुछ दिन बाज़ार बंद रखने की… कुछ और कदम चलकर कुछ दिन घरों में कैद रहने की… और कोशिश के नतीजे न आने पर लंबे लॉक डॉउन की मन्हुसियत भी सवार हो सकती है…! न किए जाने की कोई वजह भी तो बाकी नहीं रही अब…! न रैलियां, न जुलूस, न सभाएं, न लोगों की जमावट की जरूरत…! चुनाव भी तो लंबी छुट्टी पर हैं फिलहाल…! ज़्यादा नहीं तो कम से कम पंचायत और निकाय तक तो बिल्कुल नहीं…!

हनीट्रैप:- घबराहट जारी है…!

लंबी प्रशासनिक ढिलाई… Corona का लंबा अवकाश… सरकार बदल… सब कुछ गुज़र गया। हनी की मिठास से ओतप्रोत लोगों की मुस्कुराहट काफुर होने का वक्त करीब आ गया है। चार दिसंबर से इस किताब के पन्ने फिर खड़कना शुरू होने वाले हैं। प्रशासनिक और सियासी छतरी की शरण में बचे हुए लोगों को अदालती सख्तियों ने खोफ़ से भरना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है, कुछ दबे हुए नाम मंज़र ए आम पर आने वाले हैं, अपना नंबर आने की आशंका ने कई की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

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