आज पूरे देश में आजादी का जश्न मनाया जा रहा है ऐसे में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय में हजारों आदिवासी आंदोलन पर उतारू हो गए हैं… जहां एक ओर देश आजादी का जश्न मना रहा है तो वही छिंदवाड़ा के आदिवासी यह नारा लगा रहे हैं, कि आदिवासी आज भी गुलाम हैं….?हम आज़ाद नहीं हैं..? यही नहीं उग्र रूप धारण करते हुए आदिवासी जेल भरो आंदोलन पर उतारू हैं… हालांकि आदिवासियों का यह आंदोलन शांतिपूर्ण था लेकिन अचानक कुछ ऐसा हुआ कि आदिवासी समाज उग्र होकर जिला जेल छिंदवाड़ा में गिरफ्तारियां देने की जिद पर अड़ गया है..? शिवराज सिंह मुर्दाबाद जैसे अनेकों गगनचुंबी नारे लगाए जा रहे हैं…

स्टेड डेस्क/छिंदवाड़ा ब्यूरो- दरअसल छिंदवाड़ा का आदिवासी समाज बीते लगभग 2 माह से आंदोलनरत है. पहले शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन, आदिवासी अंचल तामिया में चलता रहा. जहां उन्होंने शासन प्रशासन से ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांग रखी थी. लगभग डेढ़ माह धरना प्रदर्शन करने के बाद भी उनकी मांगे पूरी ना होने के चलते आदिवासी समाज ने आज स्वतंत्रता दिवस पर जेल भरो आंदोलन का ऐलान किया था.

इसी के तहत आज जिले भर के आदिवासी छिंदवाड़ा के इमलीखेड़ा हवाई पट्टी स्थित मंदिर में एकत्रित हुआ, जहां से वे पैदल मार्च करते हुए छिंदवाड़ा के जिला जेल में पहुंचकर अपनी गिरफ्तारियां देते. किंतु पुलिस और जिला प्रशासन ने उन्हें सामाजिक मंदिर पर ही रोक लिया, जिसके बाद शांतिपूर्ण आंदोलन धीरे धीरे उग्र होता चला गया और आदिवासी समाज के लोगों ने जमकर नारेबाजी की और स्वयं को आजाद भारत में गुलाम बताया …? उनका कहना है कि लंबे समय से हमारी मांग पर सुनवाई ना होना यही दर्शाता है कि, आदिवासी आजाद देश में भी गुलाम है उक्त बातें कहते हुए आदिवासी महासभा के नेता प्रह्लाद कुसरे ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी आजाद नहीं है उन्होंने कहा कि आज लगभग 2 माह हो चुके हैं तामिया में पदस्थ थाना प्रभारी प्रीति मिश्रा ने आदिवासी समाज की बेटी के विवाह समारोह में जाकर देवी देवताओं का अपमान किया और दुल्हन बनी आदिवासी बेटी के साथ बदतमीजी की समाज के लोग भोजन कर रहे थे उनके दोना पत्तलों को लातों से फेंका. जिससे पूरा समाज आक्रोशित है. 2 माह बीत चुके हैं हम शांतिपूर्ण ढंग से संबंधित थाना प्रभारी पर एक्टरों सिटी एक्ट के तहत कार्यवाही करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमारी मांगों के विपरीत हमारे ही लोगों पर धाराएं लगाकर उन्हें आरोपी बना दिया गया है. श्री कुसरे का कहना है कि हम यहां शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं लेकिन पुलिस प्रशासन ने घेरा हुआ है जिससे हमारा समाज नाराज होकर उग्र होने को मजबूर है.

बाहरहाल जिला प्रशासन स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर मुस्तैद है साथ ही पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन के नुमाइंदे आदिवासी समाज के नेताओं से स्थल पर ही गिरफ्तारियां देने की अपील करने और समाज को मनाने के प्रयास में जुटा हुआ है….

…तब होगा आंदोलन समाप्त
दरअसल छिंदवाड़ा में समाज द्वारा किए जाने वाला जेल भरो आंदोलन को लेकर आदिवासी समाज और भी इसलिए नाराज हुआ है कि इस आंदोलन में जिले भर के विभिन्न कस्बों से आदिवासी समाज के लोग जिला मुख्यालय के लिए निकले थे लेकिन जगह-जगह थाना व चौकियों में सामाजिक लोगों को रोक लिया गया है जिसके चलते अब आदिवासी समाज के नेताओं ने प्रशासन के समक्ष यह बात रखी है कि पहले जिले में जहां-जहां सामाजिक लोगों को पुलिस के द्वारा रोका गया है उन्हें छोड़ा जाए और हमारी पूर्व मांग जिसमें पूर्व तामिया थाना प्रभारी प्रीति मिश्रा पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्यवाही की जाए तो हम आंदोलन समाप्त कर देंगे…!

छिंदवाड़ा से कन्हैया विश्वकर्मा की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

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