2-5 हजार में करा रहे नौकरी…
काम करने वाले हर कामगार को मिले न्यूनतम 18 हजार वेतन…
तहसीलदार को सौंपा सीएम के नाम मांगपत्र…
स्टेट डेस्क/छिंदवाड़ा-मप्र आउटसोर्स, अस्थाई एवं संविदा कर्मचारी कांग्रेस ने अमरवाड़ा विधानसभा के घाट पिपरिया एवं हर्रई जागीर में कामगार अधिकार सम्मेलनों का आयोजन किया। हर्रई में विधायक कमलेश प्रताप शाह के मुख्यातिथ्य एवं पूर्व नपाध्यक्ष माध्वी शाह की अध्यक्षता में कामगार अधिकार सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। जिसमें रसोईया, भृत्य, कोटवार, समूह की महिलाएं, आउटसोर्स कर्मी बडी संख्या में शामिल हुए। सम्मेलन में आउटसोर्स अस्थाई कर्मचारी कांग्रेस के सम्मेलन में ब्लाक अध्यक्ष राजकुमार ठाकुर, नपाध्यक्ष संगीता डेहरिया, नपा उपाध्यक्ष मोनू साहू, कोटवार संघ के अध्यक्ष भवानी नागवंशी, सलीम खान, बबलू डेहरिया, रामकृपाल डेहरिया, जयकुमार डेहरिया, विनोद सल्लाम, अभिषेक यादव, शिवम नागवंशी, संतोषी नागवंशी सहित सैकडों कामगार शामिल हुए। मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय मांगपत्र तहसीलदार को दिया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि 2018 के चुनाव से पहले शिवराज ने आंगनवाड़ी के लिए दीदी योजना शुरू की थी, इन्हें 3 हजार रूपए महीने देना थे, तब दीदी का उसी तरह प्रचार किया गया, जिस तरह आज लाडली बहना का किया जा रहा है। 2023 में दीदी कहां है…
शिवराज इनका नाम तक नहीं लेते!दीदी किस हाल में हैं हम बताते। शिवराज ने इनसे आंगनवाड़ी में काम कराया और जब इन्होंने मानदेय मांगा इन्हें घर बैठा दिया। 6-8 महीने काम कराया और मानदेय भी नहीं दिया। आज भी शिवराज की वह दीदी उन्हें घर में बैठी कोस रही है, लाडली बहना के साथ भी वही होना है जो दीदी के साथ हुआ। यह बात हम सबको समझना चाहिए। शर्मा ने कहा कि यदि शिवराज की नियत मदद करने की होती तो वे रसोईया, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कर्मियों सहित महिला कामगारों के वेतन में 1 हजार रूपए बढा सकते थे, मनरेगा महिला श्रमिकों को मजदूरी के अलावा हर महीने 1 हजार महीने का मानदेय तय कर सकते थे, ऐसा करके लाखों कामगार महिलाओं की मदद की जा सकती थी। लेकिन शिवराज ने ऐसा नहीं किया
सिर्फ वोट खरीदने की योजना शुरू की है। इसलिए अब सभी कामगारों को विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों की जमानत जप्त कराओ अभियान शुरू करके, अपने साथ हो रहे अन्याय का बदला लेना होगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा की शिवराज सरकार ने श्रमिकों से यूनियन बनाने तक का अधिकार छीन लिया। कामगार जब संगठन बनाकर अपने अधिकारों की बात करता है तो उन्हें कंपनी प्रबंधन, प्रशासन एवं सरकार मिलकर प्रताड़ित करते हैं और उन्हें नौकरी से निकालने की कार्रवाईयां की जाती हैं। एमपीईबी के ठेका श्रमिकों के साथ ऐसा ही किया गया। शर्मा ने कामगारों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा की शिवराज सरकार हमारी मां बहनों से 2-5 हजार रूपए में काम करा रही है, आशा ऊषा कार्यकर्ता, रसोईया, आंगनवाड़ी सहायिकाएं हमारे ही परिवारों की हैं। यह हमारी मां, बहन, बहू, बेटियां हैं। जिन्हें शिवराज न्यूनतम वेतन तक नहीं दे रहे। जब अन्याय की पराकाष्ठा हो गई तो बहना बहना चिल्लाकर 1 हजार की खैरात बांटने की नौटंकी कर रहे हैं। शिवराज की लाडली बहना 1 हजार में महिलाओं के वोट खरीदने की योजना है। चुनाव खत्म होते ही यह अपने आप बंद हो जाएगी। यह बात हमें खुद समझनी होगी और मां बहनों को समझानी होगी।
*KBP NEWS.IN*.








