जारी शैक्षणिक सत्र में सभी अशासकीय विद्यालयों में पुस्तकें और यूनिफार्म व अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान अथवा स्कूल प्रबंधन से विक्रय पर अंकुश लगाने के संबंध में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी

स्टेट डेस्क/छिन्दवाड़ा – कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी छिंदवाड़ा शीलेन्द्र सिंह द्वारा शैक्षणिक सत्र 2024-25 में जिले के सभी अशासकीय विद्यालयों में पुस्तकें और यूनिफार्म एवं अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान से ही अथवा स्वयं स्कूल प्रबंधन द्वारा विक्रय कराये जाने पर अंकुश लगाये जाने और सामान्य जन के हित में दण्ड प्रक्रिया संहिता संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत प्रद्वत शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये गये हैं । इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति/विद्यालय के प्राचार्य/प्रबंधक के विरूद्ध भारतीय दण्ड विधान की धारा 188 के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी। यह आदेश आम जनता को संबोधित है और चूंकि वर्तमान में ऐसी परिस्थितियां नहीं हैं और न ही यह संभव है कि इस आदेश की पूर्व सूचना प्रत्येक व्यक्ति/प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान को दी जाये, इसलिये यह आदेश एक पक्षीय पारित किया गया है। आदेश से व्यथित व्यक्ति दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (5) के अंतर्गत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे तथा अत्यंत विशेष परिस्थितियों में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के संतुष्ट होने पर आवेदक को किसी भी लागू शर्त से छूट दी जा सकेगी।


कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री सिंह द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के अंतर्गत छिन्दवाडा जिले में संचालित सभी अशासकीय विद्यालय जो माध्यमिक शिक्षा मण्डल, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अथवा आई.सी.एस.ई. बोर्ड से सम्बद्ध है, इन सभी विद्यालयों को 2 दिसम्बर 2020 को मध्यप्रदेश राजपत्र असाधारण में प्रकाशित एवं स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय भोपाल के आदेश में उल्लेखित निर्देशों का पालन किया जाना अनिवार्य रहेगा। सभी अशासकीय विद्यालयों के लिये यह अनिवार्य है कि वे जारी शिक्षण सत्र में लेखक व प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची मांगने पर उपलब्ध करायें ताकि विद्यार्थी और उनके अभिभावकगण इन पुस्तकों को उनकी सुविधा के अनुसार खुले बाजार से क्रय कर सकें। प्रत्येक स्कूल प्रबंधक/प्राचार्य अपने स्कूल में प्रत्येक कक्षा में लगने वाली पाठ्य पुस्तकों और प्रकाशकों की जानकारी को स्वयं की बेबसाइट में और जिला शिक्षा अधिकारी/विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को दिया जाना सुनिश्चित करें। जारी आदेश के अनुसार किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर विद्यालय का नाम अंकित नहीं होना चाहिये। विद्यालय के सूचना पटल पर यह भी अंकित किया जायेगा कि किसी दुकान विशेष से सामग्री क्रय करने की बाध्यता नहीं है। कहीं से भी पुस्तकें/यूनिफार्म व अन्य आवश्यक सामग्री क्रय की जा सकती है। पुस्तकों के अतिरिक्त शालाओं द्वारा यूनिफार्म, टाई, जूते, कापियां आदि भी अपनी संस्था/विद्यालय से उपलब्ध/विक्रय कराने का प्रयास नहीं किया जायेगा। विद्यालय की स्टेशनरी/यूनिफार्म पर विद्यालय का नाम प्रिन्ट करवाकर दुकानों से क्रय करने अथवा एक विशिष्ट दुकान से यूनिफार्म/पाठ्यपुस्तकें बेचना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी, तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला स्त्रोत समन्वयक इस आदेश का पालन सुनिश्चित करायेगें। स्कूल संचालक/प्राचार्य विद्यार्थी और अभिभावकों को सूचीबद्ध पुस्तकें परीक्षा परिणाम व उसके पूर्व क्रय करने के लिये बाध्य नहीं करेंगे। अभिभावक सुविधा के अनुसार पुस्तक क्रय कर सकेंगे। किसी भी पुस्तक विक्रेता अथवा स्कूल के द्वारा कापियाँ पुस्तक सेट के साथ अनिवार्य रूप से खरीदे जाने के लिये बाध्य नहीं करेगा। स्कूल जिस नियामक यथा सी.बी.एस.ई, आई.सी.एस.ई, एम.पी.बी.एस.ई., माध्यमिक शिक्षा मण्डल आदि से सम्बद्ध है, उस संस्था के द्वारा निर्धारित पाठ्यकम नियामक संस्था अथवा उसके द्वारा विधिक रूप से अधिकृत एजेन्सी अथवा प्रकाशक के अतिरिक्त अन्य मुद्रकों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों को विद्यालय में अध्यापन के लिये प्रतिबद्वित करेंगे। स्कूल संचालक, प्राचार्य, विक्रेता द्वारा पुस्तकों की कीमत बढाये जाने के लिये अनावश्यक सामग्री जो निर्धारित पाठ्यक्रम से संबंधित ही नहीं है, का समावेश सेट में नहीं किया जायेगा। कोई भी दुकान विक्रेता किसी भी कक्षा के पूरे सेट को क्रय करने की बाध्यता नहीं रखेगा। यदि किसी विद्यार्थी के पास पुरानी पुस्तकें उपलब्ध हैं तो उसे केवल उसकी आवश्यकता के अनुसार ही पुस्तक विक्रेता द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी। पुस्तक विक्रेता पुस्तकों के साथ कवर, स्टीकर, पेन्सिल बाक्स, कम्पाक्स बाक्स, आदि को क्रय करने के लिये बाध्य नहीं करेंगे। नोट-बुक कापी पर ग्रेट, किस्म, साईज, पृष्ठ संख्या, मूल्य स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिये। किसी भी विद्यालय द्वारा नोट-बुक कापी, पुस्तक अथवा इन पर चढ़ाये जाने वाले कवर पर विद्यालय का नाम अंकित नहीं करेंगे। यह आदेश सभी निजी विद्यालय संचालक, विद्यार्थी और अभिभावकों को अवगत कराये जाने के साथ ही नोटिस बोर्ड पर आदेश की प्रति चस्पा करने के निर्देश संबंधित शाला के प्राचार्य को दिये गये हैं।

KBP NEWS.IN
जाहिद खान
9425391823

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