स्टेट डेस्क/छिंदवाड़ा- प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी जिले की सबसे पुरानी सक्रिय नाट्य संस्था एवं एकमात्र रंगमंडल नाट्यगंगा के द्वारा नए कलाकारों को रंगकर्म से जोड़ने के लिए 1 मई से 45 दिवसीय फिल्म एवं थियेटर एक्टिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसका समापन विगत दिवस एक भव्य नाटक के मंचन के साथ श्रेयांश टॉकीज में हुआ। यह नाटक लोक कथाकार विजय दानदेथा की कहानी पर आधारित था जिसका बहुत ही प्रभावी नाट्यरूपांतरण एवं निर्देशन संस्था के गुरू एवं रंगमंडल के गुरू सचिन वर्मा के द्वारा किया। जिन्होंने नाटक के सभी दृश्यों को इतनी खूबसूरती से लिखा और मंच पर रचा कि दर्शक आश्चर्य चकित हो गए। नाटक को अमित सोनी ने अपने गीत और संगीत से सजाया। इन गीतों से नाटक का मंतव्य दर्शकों तक आसानी से पहुँच पाया।

नाटक का सहनिर्देशन विनोद प्रसाद ग्यास, तरूण जलोटा, अर्शिल चिचाम, हर्ष डेहरिया, पूनम बचले, गुंजन मेटेकर और दानिश अली ने किया। इस नाटक में नए एवं पुराने 50 से अधिक कलाकारों ने मंच पर एवं मंच परे कार्य किया। नाटक की कहानी एक सुप्रसिद्ध भांड शंकर भांड के इर्दगिर्द चलती है। जो तरह तरह के स्वांग करता है और और अपने स्वांग के माध्यम से वह दर्शकों को रिजक यानि रोजी रोटी की मर्यादा सिखा जाता है। हास्य व्यंग्य से भरपूर यह नाटक अंत में इतना संवेदनशील मोड़ ले लेता है कि दर्शकों की ऑंखें नम हो गईं। नाट्यगंगा की परंपरा के अनुसार नाटक नियत समय पर शुरू हुआ एवं हर बार की तरह यह प्रदर्शन भी हाउस फुल रहा। इस कार्यशाला एवं नाट्य मंचन को सफल बनाने में संस्था के कलाकारों अमजद खान, नीता वर्मा, स्वाति चौरसिया, अंकित खंडूजा, पंकज सोनी, वैशाली मटकर, नीरज सैनी, रूपेश डेहरिया, रोहित रूसिया, अर्पणा पाटकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन्होंने किया शानदार अभिनय…
इस नाटक में श्रीधर शर्मा शंकर भांड, करूणा गांजरे पारबती, अदितांश चौरसिया और अबीर वर्मा शंकर के बच्चे, विनोद प्रसाद ग्यास और गीतश्री वर्मा शंकर के माता-पिता, गुंजन मेटेकर राजा, प्रियांशी बत्रा रानी, नभ बचले रानी का भाई, अवनि सोनी सहेली, विशाल धुर्वे मंत्री, खुश्बू बंदेवार दीवान, अर्शिल चिचाम विदूषक, जयंत जम्होरे और अंशुल विश्वकर्मा दरबारी, शिवांश श्रीवास्तव हज्जाम, हर्ष डेहरिया डायन, चेतन डेहरिया सेठ, किरण मोर सेठ की पत्नि, शांभवी गुप्ता बच्ची, अंशुल यादव लठैत, शिवम उइके ढिंढोरची, पूनम बचले, रश्मि पाठक, गरिमा बत्रा, शिवि भारद्वाज, स्वस्ति द्विवेदी ने ग्रामीण महिला, हेमंत नांदेकर, कुलदीप विश्वकर्मा, धर्मेंद्र तेकाम, निखिल डेहरिया, पुनीत डेहरिया, अरिंदम मालवी, ओम तिवारी, विशाल काकोड़िया ने ग्रामीण पुरूष और वेद श्रीवास्तव, आरोही रत्नाकर, अनादि सोनी, चित्राक्ष ओक्टे, आरोही वाड़बुदे, श्रीरज कोल्हे, श्रीम पटवा ने शंकर भांड के शिष्यों की अविस्मरणीय भूमिका निभाई।

ऑडिटोरियम की कमी खली…
शहर में एक सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम के नहीं होने का खामियाजा कल नाट्य मंचन के दौरान कलाकारों के साथ साथ दर्शकों को भी भुगतना पड़ा। ऑडिटोरियम के अभाव में शादी के लॉन में मंचन किया गया जहाँ गर्मी और उमस से दर्शक और कलाकार परेशान होते रहे। इसके साथ ही नाट्य मंचन के बीच में तकनीकि समस्या आने के कारण दस मिनट के लिए मंचन रोकना पड़ा। लेकिन इन सब समस्याओं के बाद भी दर्शकों के धैर्य, समझदारी और सहयोगात्मक रवैये से कलाकारों ने नाटक का शानदार मंचन किया।

KBP NEWS.IN
…संजय औरंगाबादकर

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