स्टेड डेस्क,
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदेश के किसानों और आम जनता की बेहाली से रू-ब-रू कराया. उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में किसान बिल का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह बिल किसान हित में ना होकर दलालों और बड़े व्यापारियों के हित का बिल है…? उन्होंने कहा कि इस बिल में जो व्यवस्था की गई है उसे रोका जाना चाहिए. उन्होंने कहा तीन अध्यादेश के बड़े नुकसान यह है कि इसमें किसानों को एमएसपी के दायरे में नहीं लाया गया है, न्यायालय के न्याय से वंचित करना और व्यापारियों की जमाखोरी कालाबाजारी को बढ़ावा देना मंडी व्यवस्था को ध्वस्त करने के बराबर है. उन्होंने कहा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के द्वारा किसानों को खेती से अलग कर व्यापारियों को बढ़ावा देने का मतलब यह है कि किसान अपने ही खेत में मजदूर बन जाएगा .

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पत्र में मक्के और सोयाबीन के उपार्जन का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रदेश में समर्थन मूल्य पर जो उपार्जन हो रहा है उसमें मक्का की फसल बड़ी मात्रा में होती है और मक्का उत्पादन में छिंदवाड़ा सहित सिवनी जबलपुर और आसपास के जिले अग्रणी है श्रीनाथ ने कहा कि समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी ना होने से किसानों की मक्का जो 1850 रुपए प्रति क्विंटल खरीदी जाती थी वहां अब 800 से 900 रुपए में व्यापारियों को बेचने को मजबूर है. उन्होंने कहा प्रदेश सरकार ने ना भावन्तर लागू किया है नाही किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी कर रही है. उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द जिन जिलों में मक्का की फसल अधिक मात्रा में होती है वहां समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू की जावे.
कमलनाथ ने फसल बीमा के रूप में किसानों के साथ हो रहे छल का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को अधिकतम जो बीमा दिया गया है वह 1 क्विंटल फसल की कीमत भी नहीं है उन्होंने कहा ओलावृष्टि और अधिक वर्षा से प्रदेश के किसान अत्यधिक प्रभावित हुए हैं जिन्हें मुआवजे के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खूब हवाई दौरे किए, लेकिन अब तक किसानों को ₹1 का भी मुआवजा नहीं दिया गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा किसानों को सहायता राशि के नाम पर ₹4000 प्रति किसान को दिए जाने की घोषणा पर भी सवाल खड़े किए हैं . कमलनाथ ने कहा है कि शिवराज सिंह चौहान इस आपदा में किसानों का उपहास कर रहे हैं जबकि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व से ही किसानों को ₹6000 की सहायता दी जा रही थी उसी में यह ₹4000 भी बढ़ाकर किसानों के खाते में डाले जा सकते थे प्रदेश सरकार के पास सभी किसानों का रिकॉर्ड है सीधे राशि डाल दी जानी चाहिए थी लेकिन उपचुनाव के चलते किसानों से पुनः पंजीयन कराए जाने का ढकोसला किया जा रहा है. कमलनाथ ने प्रदेश की बेरोजगारी और संक्रमण से जूझते समाज को स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुविधा प्रदान की जाने की मांग की है…
कमलनाथ ने केंद्र की मोदी सरकार पर आम जनता की रसोई में डाका डालने का आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ जैसी फर्जी पैकेज की घोषणा की है जिसका एक रुपए का भी फायदा गरीबों को नहीं मिला, बल्कि सरकार गरीबों और आम जनता को पहले से मिल रही राहत को भी तानाशाह तरीके से खत्म कर रही है. कमलनाथ ने रसोई गैस पर जल्द से जल्द सब्सिडी चालू करने और आम जनता को राहत देने की मांग प्रधानमंत्री से की है…
उक्त तमाम बातों की जानकारी आज जिला कांग्रेस कमेटी छिंदवाड़ा के अध्यक्ष गंगा प्रसाद तिवारी ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर दी है . इसके साथ ही उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से गैस सब्सिडी खत्म कर दी है उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने पिछले 3 महीने से गैस सब्सिडी खातों में नहीं डाली है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लॉकडाउन और कोरोना जैसे कठिन समय में जनता की जेब में डाका डाल रही है…. इधर जुन्नारदेव विधायक सुनील उईके ने भी फसल बीमा और डूब क्षेत्र के किसानों की समस्याओं की बात रखी वहीं सौसर विधायक विजय चौरे ने कहा कि हम 2 अक्टूबर को ज्ञापन के माध्यम से शासन से निवेदन करेंगे की किसान और आमजन को राहत मिले. यदि मांगे पूरी नहीं होती है तो जल्द ही बड़ा आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी…
Md. ज़ाहिद खान, एडिटर इन चीफ़, 9425391823








