स्टेड डेस्क- सूचना का अधिकार एक ऐसा अधिनियम है जिसने जनता को सरकार के तमाम कामकाज और दस्तावेजों से जोड़ दिया है. इस अधिनियम ने जनता को यह अधिकार दिया है कि वह सरकार से और उसके नुमाइंदों से शासकीय राशि से किए गए विभिन्न कार्यों एवं राशि के विषय में समस्त जानकारी प्राप्त कर सकता है. इस अधिनियम के माध्यम से देश के अंदर अनेकों भ्रष्टाचार शासकीय राशि का दुरुपयोग एवं अन्य गंभीर मामले उजागर हुए हैं किंतु बीते कुछ वर्षों से सूचना का अधिकार अधिनियम के पालन में सुस्ती देखी जा रही है. नौकरशाहों की मनमानी और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट सताए जा रहे हैं उन्हें जानकारी ना देने की सूरत में तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है साथ ही कुछ मामलों में आर्थिक सहयोग की बात कर जानकारी छुपाई जाती है …! राज्य सूचना आयोग में भी कई मामले विचाराधीन है लंबा समय बीतने के बाद भी सुनवाई नहीं हो पाती है, लेकिन राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए एक अभूतपूर्व निर्णय दिया है, जिसमें उन्होंने एक आरटीओ पर ₹25000 का अर्थदंड सुनाया है साथ ही उन्होंने अपर मुख्य सचिव परिवहन को ही निर्देशित किया है कि उक्त आरटीओ की भूमिका सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत है अतः उन्हें विभागीय कार्यवाही भी आदेशित की जाए… निश्चित रूप से यह निर्णय उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए सावधान होने का संदेश दे रहा है जो अधिकारी भ्रष्टाचार कर शासन को चूना लगा रहे हैं और सूचना के अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं…

रीवा- दरअसल यह मामला रीवा का है जहाँ अपीलार्थी शरद औदिच्य द्वारा गत 21.10.2019 को लोक सूचना अधिकारी तथा RTO रीवा मनीष त्रिपाठी से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मंगाई थी। जानकारी ना देने पर मामला अपील में राज्य सूचना आयोग पहुंच गया था जहां अपीलार्थी की अपील पर ऑनलाइन सुनवाई करते हुए यह अभूतपूर्व फैसला दिया गया।


आयोग द्वारा सुनवाई करते हुए अपने निर्णय में बताया की क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रीवा मनीष त्रिपाठी द्वारा जानकारी कार्यालय में उपलब्ध होने के बाद भी जानबूझकर अपीलार्थी को समय सीमा में प्रदान नही की गई। आयोग ने RTO रीवा पर जुर्माना अधिरोपित करने के साथ ही अपर मुख्य सचिव परिवहन विभाग एस.एन.मिश्रा को निर्देशित किया की उक्त प्रकरण में त्रिपाठी की भूमिका सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत है अतः उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही भी आदेशित की जाये। साथ ही 1 माह में जुर्माने की राशि ना जमा कराने पर नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही प्रस्तावित करने के भी निर्देश दिए।
ऐसी स्थिति में RTO रीवा पर निलम्बन की गाज भी गिर सकती है। जो भी हो लापरवाह नौकरशाहों पर राज्य सूचना आयोग का उक्त निर्णय आम जनता की जीत है जिससे हर एक लापरवाह नौकरशाह को सबक जरूर मिलेगा।

Md.ज़ाहिद खान, एडिटर इन चीफ़, 9425391823

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