काम अभी पूरा भी नहीं हुआ कि, 145 करोड़ की नहर हुई जर्जर…

स्टेड डेस्क/ छिंदवाड़ा- मध्य प्रदेश के चर्चित जिलों में से एक छिंदवाड़ा इन दिनों भ्रष्टवाड़ा बना हुआ है! यहां नौकरशाहों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते ठेकेदारों की बल्ले बल्ले हो गई है. आलम यह है कि शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी पलीता लगता जा रहा है. जहां एक ओर प्रदेश के मुखिया किसानों को बेहतर और सुलभ व्यवस्थाएं मुहैया कराने, प्रदेश की कृषि भूमि का रकबा बढ़ाने और किसानी को लाभ का धंधा बनाने का स्वप्न संजोए हुए हैं तो वहीं, तो वहीं नौकरशाहों ने भी पलीता लगाने में कमी नहीं छोड़ी है. अकेले छिंदवाड़ा का आलम यह है कि यहां पेंच परियोजना के तहत बन रही 145 करोड़ की नहर निर्माण पूर्ण होने के पहले ही जर्जर हो गई है. यही नहीं कुछ जगह से तो नहर फूट गई है और जो पानी किसानों को पहुंचना चाहिए वही व्यर्थ में गंदे नाले में बह रहा है.
छिंदवाड़ा राजनीतिक परिदृश्य से हो या भौगोलिक परिदृश्य से, प्रदेश के अन्य विकसित जिलों में शुमार है यहां खेती उन्नत होती है और मक्का की फसल के लिए छिंदवाड़ा कॉर्न सिटी के रूप में भी जाना जाता है जिसे किसानी के क्षेत्र में और भी बेहतर बनाने के लिए जहां सैकड़ों करोड़ खर्च करके शासन ने पेंच परियोजना का निर्माण कराया तो वहीं इस परियोजना से छिंदवाड़ा सहित सिवनी जिले को नहर के माध्यम से पानी पहुंचाने के लिए 145 करोड़ की नहर निर्माण की स्वीकृति भी प्रदान की. लेकिन सरकार की इस महती परियोजना पर नौकरशाहों की अनदेखी और कमीशन बाजी ने प्रश्नचिन्ह लगा दिया है. नहर का काम अभी चल ही रहा है लेकिन पूर्व में जो निर्माण हुए हैं वह दुर्दशा की दास्तान खुद बयान कर रहे हैं. आलम यह है कि आगे आगे काम चल रहा है और पीछे नहर कहीं से टूट गई है कहीं फूट गई है तो कई जगह नहर में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई है, लेकिन इन सबके बीच चौंकाने वाली तस्वीर तब आई जब परतापुर के पास एक्वाडक्ट को नहर से जोड़ने वाला हिस्सा ही ढह गया..?
गौरतलब हो कि जहां नहर निर्माण हो चुका है उस एरिये की नेहर में डैम का पानी किसानों के लिए छोड़ दिया गया है, ताकि किसानों को सिंचाई हेतु भरपूर पानी मिल सके. इसी बीच शनिवार को परतापुर गांव के पास नहर से जोड़ने के लिए कंक्रीट का नहर स्ट्रक्चर बनाया गया था जोकि घटिया निर्माण के चलते टूट गया. जिससे किसानों को पहुंचने वाला पानी नाले में बह रहा है.


कमीशन खोरी और ठेकेदार की मनमानी

145 करोड़ की नहर के घटिया निर्माण के पीछे कमीशन खोरी की अहम भूमिका है क्योंकि घटिया निर्माण का होना और अधिकारियों को ना दिखना यही साबित करता है. यदि कमीशन और दक्षिणा की रस्म अदायगी नहीं होती तो आज शासन की बड़ी राशि का दुरुपयोग भी नहीं होता? नहर की दुर्दशा भी यही बताती है. दरअसल कमीशन के चलते ठेका कंपनी ने मनमर्जी से नहर की ड्राइंग और डिजाइन भी बदल डाली और इसके साथ ही लागत कम और रकवा पूरा दिखाने के चलते निर्माण की गुणवत्ता से भरपूर समझौता किया गया.


तौबा-तौबा… हद कर दी आपने…

क्या आपने कभी देखा है की भवन निर्माण के बाद उसकी नीव खोदी जा रही हो, या आपने पानी से भरे तालाब में फर्सीकरण करते हुए देखा है..? शायद नहीं देखा होगा. क्योंकि फिलहाल ऐसी कोई टेक्नोलॉजी डेव्हलप नहीं हुई है. लेकिन भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र की कृपा हो तो ठेकेदार कुछ ऐसा करने से पीछे नहीं हटेंगे.! जी हां हमें भी ऐसे सवाल करने में शर्म आ रही है लेकिन छिंदवाड़ा की ठेका कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों ने शर्म बेच खाई है उन्हें शर्म नहीं आती.? क्योंकि उन्होंने कारनामा ही कुछ ऐसा कर दिखाया है. दरअसल नहर कैनाल निर्माण पद्धति की बात की जाए तो टी टू कैनाल निर्माण के बाद ही, उसमें पानी छोड़ा जाता है. यह बात इस क्षेत्र के जानकार अच्छी तरह जानते हैं लेकिन छिंदवाड़ा में टी टू कैनाल निर्माण के पहले ही पानी छोड़ दिया गया. कई दिन तक पानी रहने के बाद अब कैनाल खोदने का काम किया जा रहा है. है ना कमाल की बात, यह सुनकर कोई भी कहेगा- तौबा तौबा, हद कर दी आपने…


145 करोड़ रुपए में 59 k.m. का सफ़र

बंदरबांट की दास्तान तो हमने आपको सुना दी, लेकिन इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि आखिर यह परियोजना कितनी महत्वपूर्ण है. दरअसल केंद्र और राज्य सरकार की राशि से छिंदवाड़ा में माचागोरा पेंच परियोजना का निर्माण हुआ है यह निर्माण छिंदवाड़ा और सिवनी जिले के किसानों को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराने की मंशा से तैयार की गई है. जिसमें सैकड़ों करोड़ों रुपए खर्च किया गया है. वही पृथक से 145 करोड़ रुपए पेंच परियोजना से सिवनी ब्रांच केनाल के निर्माण के लिए स्वीकृत हुए हैं इस राशि से 59 किलोमीटर लंबी सिवनी ब्रांच केनाल 4 डिस्ट्रीब्यूटरी और माइनर कैनाल का निर्माण होना है इस निर्माण के बाद 27 हजार हेक्टर कृषि भूमि सिंचित होगी. लेकिन सवाल यह उठता है कि 145 करोड़ रुपए में 59 किलोमीटर का यह सफर सफलतम पूरा होगा या फिर नौकरशाहों की अनदेखी के चलते घटिया निर्माण का खामियाजा दोनों जिलों के किसानों को भुगतना पड़ेगा..?

इनका कहना है
इधर इस गंभीर मामले पर अधिकारियों का वही रटा-रटाया जवाब है कि स्ट्रक्चर के ढहने की खबर मिली मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है. इसकी जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी.

डी एस टेकाम
ई.ई., जल संसाधन विभाग

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