वन विभाग पर एक बार फिर संगीन आरोप लगे हैं, इस बार एक आदिवासी ग्रामीण के ऊपर जंगल में गोली चली है.? और घायल ग्रामीण ने विभाग पर गोली चलाने का आरोप जड़ा है.! घायल ग्रामीण का उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है. लेकिन बड़ी बात यह है कि घायल के शरीर से न तो बंदूक की गोली मिली, ना ही कहीं कोई निशान मिला.! लेकिन उसके पैर में भरमार से फायर होने के बाद निकलने वाली किरची मिली है…

स्टेड डेस्क- छिंदवाड़ा वन वृत्त के पश्चिम वन मंडल अंतर्गत सावरी रेंज एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है. यहां एक आदिवासी ग्रामीण पर विभाग के कर्मचारी द्वारा गोली चलाई जाने का मामला सामने आया है. यह घटना रविवार की बताई जा रही है और इस घटना में घायल ग्रामीण सोमवार को जिला अस्पताल में परिजनों द्वारा भर्ती कराया गया है.

सांवरी वन परिक्षेत्र अंतर्गत प्रधान घोघरी निवासी उज्जेलाल पन्द्राम ने वन विभाग पर गोली चलाने का आरोप लगाया है. उज्जेलाल को उसके परिवार वालों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया है जहां उसका उपचार चल रहा है. उज्जेलाल ने बताया कि वह प्रतिदिन की तरह गाय बैल चराने जंगल गया था और वहां जलाऊ लकड़ी भी इकट्ठा कर रहा था. तब वहां जलाऊ लकड़ी काट रहा था तब वहां दो लोग आए, उनमे से 1 ख़ाकी वर्दी में था. उन्होंने मुझ पर अचानक पीछे से गोली चलाई, मुझे गोली की आवाज़ भी आई और मेरे पैर में कुछ लगा, और में बेहोश हो गया. उज्जेलाल के मुताबिक़ वो जब होस में आया तो घर गया. घर वालों को बताया और उसे जिला अस्पताल लाया गया. जहां उसके पैर में कांच और लोहे की किरचियां गड़ी हुई थीं, जिसे उपचार कर निकाला गया है. बताया जाता है कि इस तरह की किरचियां और छर्रे इत्यादि भरमार बन्दूक के फायर में निकलते हैं.?
मगर इन सबके बीच यह बात तो साफ होती है कि उज्जेलाल पर बंदूक की नहीं भरमार से फ़ायर हुआ है.? तभी तो उसके पैर में भरमार में पाई जाने वाली किरची निकली है.?

कहीं यह शिकारियों की करतूत तो नहीं…?
अगर भरमार है तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जंगल मे शिकारी मौज मना रहे हैं.! सुत्रों की माने तो सांवरी वन परिक्षेत्र में शिकार होना नई बात नहीं है..! यहां शिकारी सक्रीय हैं. यदि इस बात में दम है तो यह भी हो सकता है कि उज्जेलाल शिकारी द्वारा फ़ायर किये गए भरमार की बन्दूक से निकलने वाले कंडो से घायल हुआ हो.? और अगर ऐसा है तो शिकारी के साथ ख़ाकी वर्दी वाला कौन था..? खैर, फ़िलहाल यह तफ़्तीश का मामला है कि आख़िर उज्जेलाल पर गोली चली या कुछ और…?

मामला पुलिस का है
इधर इस पूरे मामले में विभाग के आला अफ़सरान का कहना है कि यह पुलिस जांच का मामला है. पश्चिम वन मंडल के डी एफ ओ श्री पाठक ने बताया कि विभाग के पास 12 बोर हैं लेकिन उसे भी चलाने का अधिकार नहीं है. उन्होंने बताया कि उज्जेलाल पर पूर्व में अवैध लकड़ी का मामला बना है, उन्होंने बताया कि इन दिनों जंगल मे आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर वन कर्मी जंगल मे पेट्रोलिंग करते है उस दिन भी जंगल मे घूमने के दौरान लकड़ी काटने की आवाज़ आ रही थी, कर्मियों ने आवाज भी लगाया था, जा कर देखा भी था लेकिन कोई दिखा नहीं. लगता है कर्मियों की आवाज सुनकर उज्जेलाल भागा होगा और उसे पैर में चोंट लगी होगी. उन्होंने ग्रामीण द्वारा लगाए गए सभी आरोपो को झूठा बताया है.

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