सेंट्रल डेस्क

सारे जहां से अच्छा , हिन्दुस्तां हमारा,

हम बुलबुले हैं इसके , ये गुलसितां हमारा।

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

हिंदी हैं हम, वतन है- हिन्दुस्तां हमारा।।

इन पंक्तियों में वह तमाम भाव समाए हुए हैं जो हमारे देश की खूबसूरती को बयान करता है। इन पंक्तियों में वह जज्बा है जो हिंदुस्तान के हर बाशिंदे के अंदर पाया जाता है साथ ही देश के इस गुलसितां को तरोताज़ा रखने के लिए देश प्रेम की भावना और धार्मिक एकता अखंडता और सेवा के भाव को जागृत करता है। देश के अंदर ऐसे असंख्य सेवा भाव वाले महान लोगों में से एक मोहम्मद शरीफ हैं जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत किया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि मोहम्मद शरीफ साइकिल सुधारने का काम करते हैं इसके बावजूद भी उन्होंने वो काम किया है जो बड़े-बड़े धनी भी नहीं कर पाते हैं।

उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले मोहम्मद शरीफ ने अपनी सेवा भाव से पिछले 25 सालों में 25000 से ज्यादा लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया है। उन्होंने अपने इस उल्लेखनीय कार्य के दौरान यह पूरा ध्यान रखा कि मृतक किस धर्म से ताआल्लुक रखता है, उसी आधार पर उन्होंने पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया है। अपने आप में यह कार्य धार्मिक रूप से बड़ा ही पुण्य का है ।

मोहम्मद शरीफ का यह कार्य बड़ा ही रश्क करने वाला है कि आखिर उन्होंने कितनी शिद्दत से इस पुनीत कार्य को पूरे विधि विधान और रीति-रिवाजों के आधार पर कराया। उन्होंने सवा सौ करोड़ देशवासियों को एक पैगाम भी दिया है कि मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना………. ?

मोहम्मद शरीफ जब जब देश में पद्मश्री पुरस्कार का जिक्र होगा तब तब इतिहास आपका नाम जरूर दोहराएगा….

जय हिंद

गणतंत्र दिवस पर जाहिद खान की खास रिपोर्ट

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