स्टेड डेस्क/मण्डला ब्यूरो- लंबे समय से आदिवासी संगठनों और आदिवासी जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकार और शासन से विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित किए जाने की मांग की जा रही है. जिसके चलते कुछ जिलों में लोकल अवकाश घोषित किया गया है तो वही आदिवासी क्षेत्र वाले जिलों में आदेश जारी करने के बाद निरस्त कर दिए गए हैं. जिसके बाद से क्षेत्र के आदिवासी समाज में रोष व्याप्त है. नतीजा यह है कि मध्यप्रदेश के मंडला में कांग्रेस के विधायक एवं पूर्व मंत्री भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं…

दरअसल यह सारा बखेड़ा अपर कलेक्टर और अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी के दो अलग-अलग आदेशों को लेकर खड़ा हुआ है. जिसके तहत मंडला अपर कलेक्टर के पहले आदेश क्रमांक एस सी/2021/339A दिनांक 5/08/ 2021 में यह उल्लेख किया गया था, कि पूर्व के आदेश को संशोधित करते हुए दिनांक 9/8/ 2021 को विश्व आदिवासी दिवस पर स्थानीय अवकाश घोषित किए जाने के आदेश जारी किए गए थे.

प्रथम संशोधित आदेश जिसमें विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को स्थानीय अवकाश की घोषणा की गई है

संशोधित आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि यह आदेश कलेक्टर के आदेशानुसार जारी किए गए हैं…! किंतु बखेड़ा तब खड़ा हुआ जब अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी का दूसरा पत्र इसी संबंध में दिनांक 5/8/2021 को जारी किया गया. जिसमें कार्यालय जारी आदेश क्रमांक एस सी/202/ 339A को संशोधित कर 9 अगस्त 2021 विश्व आदिवासी दिवस पर स्थानीय अवकाश की घोषणा को निरस्त कर दिया गया.?

द्वितीय संशोधित आदेश जिसमें विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को घोषित अवकाश को निरस्त करने क्या आदेश जारी किए गए

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी के पत्र क्रमांक एस सी/ 2021/ 343 के इस संशोधित आदेश के बाद से आदिवासी समाज में भारी गुस्सा है. जिसको लेकर मंडला में रानी दुर्गावती स्मारक के सामने कांग्रेस के निवास विधायक अशोक मर्सकोले, बिछिया विधायक नारायण सिंह, पट्टा शाहपुरा विधायक भूपेंद्र मरावी एवं पूर्व मंत्री तथा वर्तमान डिंडोरी विधायक ओमकार मरकाम भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. जिनकी मांग है कि विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को शासकीय अवकाश घोषित की जाए. बाहरहाल प्रशासनिक अधिकारियों का इस तरह से आदेशों को बार बार संशोधित कर समाज को भ्रमित करने के चलते यह आंदोलन की स्थिति निर्मित हुई है.? ऐसे में शासन और सत्ता का समन्वय ना होना स्पष्ट प्रतीत होता है. इसके साथ ही कई प्रश्न भी खड़े होते हैं कि एक ही तारीख पर दो संशोधित आदेश जारी किए गए और दोनों ही बार भ्रम की स्थिति निर्मित हुई.?

कंटेंड एडिटर सलीम खान की रिपोर्ट

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