कन्या शिक्षा परिसर की नाबालिक छात्रा के साथ हुए दुराचार को उजागर करना सहायक आयुक्त को पड़ा महंगा

महीनों बाद जुन्नारदेव थाने में AC एनएस बरकड़े पर 23 पॉक्सो एक्ट 74 किशोर न्याय अधिनियम के तहत मामला दर्ज

जुन्नारदेव कन्या शिक्षा परिसर की 15 वर्षीय यौन पीड़ित नाबालिक आदिवासी छात्रा की सहायक आयुक्त ने ही की थी पहचान उजागर

छिन्दवाड़ा के जुन्नारदेव के एक कन्या शिक्षा परिसर में अध्ययनरत नाबालिक आदिवासी छात्रा का शारीरिक शोषण, उसके गर्भवती होने तथा प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मृत्यु के बाद आदिमजाति विभाग के सहायक आयुक्त द्वारा पीड़िता की मीडिया के समक्ष पहचान उजागर करना महंगा पड़ गया।

इस संबंध में सहायक आयुक्त के खिलाफ 23 पॉक्सो एक्ट 74 किशोर न्याय अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। दर्ज FIR में कहा गया है कि नाबालिक के साथ हुए बलात्कार के बाद सहायक आयुक्त द्वारा उसकी पहचान उजागर किया गया था। जिसका संज्ञान बाल संरक्षण आयोग नई दिल्ली द्वारा लिया गया था। जिसके बाद पुलिस को सहायक आयुक्त पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।

बीते वर्ष 6 दिसंबर को घटित नाबालिक आदिवासी छात्रा के यौन शोषण जैसे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक बेशर्मी के चलते केवल जमीनी सिपाहियों की ही बलि दी गई थी। जिनमें छात्रावास अधीक्षिका, प्राचार्य, बीईओ औऱ बीएमओ पर करवाई की गई थी,
बता दे कि यौन हिंसा से बच्चों का संरक्षण कानून (पॉक्सो) की धारा 23 में यौन हिंसा के शिकार बच्चों से संबंधित मामलों की खबरें देने के बारे में मीडिया के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित है, जबकि धारा 228 (ए) ऐसे अपराध में पीड़ित की पहचान का खुलासा करने के बारे में है। कानून में इस अपराध के लिए दो साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

सेंट्रल डेस्क

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