स्टेट डेस्क- छिंदवाड़ा लोकसभा सीट आजादी के बाद से अभी तक एक बार के अपवाद के अलावा हमेशा कांग्रेस का गढ़ रही है । आजादी के बाद से अभी तक हुए कुल 19 लोकसभा चुनाव में केवल 1997 के लोकसभा चुनाव में यहां पर भाजपा के सुंदरलाल पटवा ने जीत हासिल की थी। इसके अतिरिक्त 18 बार से यहां पर कांग्रेस का ही कब्जा है । और अब भाजपा की ऐतिहासिक जीत हुई है। इस बार भाजपा के विवेक साहू लगभग सवा लाख वोटों से जीते हैं। आपको बता दें विवेक साहू ने इसके पहले के दो विधानसभा चुनाव कमलनाथ ने विरुद्ध लडा था जिसमे उन्हें हार का मजा चखना पड़ा था और इस लोकसभा चुनाव में पार्टी ने फिरसे तीसरी बार विवेक को प्रत्यासी बनाया और उन्हे तीसरी बार बड़ी कामयाबी हासिल हुई।

ये है छिंदवाड़ा लोस का इतिहास…
लोकसभा चुनाव 2024 में छिंदवाड़ा में इतिहास रच गया। यहां 1980 से लगातार कमलनाथ सांसद रहे और उसके बाद 2019 में उनके बेटे नकुलनाथ सांसद बने। 1997 में एक बार केवल भाजपा यहां से जीती थी और सुंदरलाल पटवा सांसद बने थे। लेकिन उसके अलावा कभी भी 1980 के बाद से कांग्रेस छिंदवाड़ा का चुनाव नहीं हारी। इस बार एक स्थानीय प्रत्याशी विवेक बंटी साहू पर भाजपा ने दांव खेला था और इस बार भाजपा ने कमलनाथ के गढ़ को ढहा दिया।
इन वोटर्स ने कर दिया खेला…
छिंदवाड़ा लोकसभा में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिसमें कुल 16 लाख 19 हजार 101 वाटर है इस लोकसभा क्षेत्र का 75 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण है केवल 25% वोटर ही शहरी क्षेत्र में रहते हैं जिनमें से 818257 पुरुष एवं आठ लाख 826 महिला वोटर हैं । छिंदवाड़ा जिले में ओबीसी और एसटी मतदाता दोनों ही 36℅_36% है एवं 11फीसदी वोटर अनुसूचित जाति के हैं । जिले में कल 1934 पोलिंग बूथ में से 497 बूथ ऐसे हैं जहां पिछले पांच चुनाव में बीजेपी कभी नहीं जीती है वहीं पर 250 बूथ हैं जिन पर भाजपा कभी नहीं हारी । 2019 की लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 47.70 फ़ीसदी वोट मिले थे एवं भाजपा को 45.009 प्रतिशत वोट मिले थे ।
पुराने कांगेसी और नए भाजपाइयों ने बिगाड़ा खेल…
छिंदवाड़ा में कांग्रेस से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का भाजपा में जाने का सिलसिला चल रहा है कांग्रेस छोड़कर जाने वालों में सबसे प्रमुख नाम पूर्व कैबिनेट मंत्री दीपक सक्सेना, छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम आहके, अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह, पूर्व विधायक चौधरी गंभीर सिंह, अज्जू ठाकुर आदि हैं इसके अलावा कई पार्षद एवं सभापति तथा जनपद सदस्य भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इनके इस कदम से भी कांग्रेस का खेल बिगड़ा है और कमलनाथ के बने हुए समीकरण को बदल दिया गया।
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….जाहिद खान
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