सिर्फ दो एफआइआर पर कलेक्टर ने किया जिला बदर, हाईकोर्ट ने आदेश किया रद्द, लगाया 50 हजार का जुर्माना…
स्टेट डेस्क/जबलपुर- महज दो एफआइआर पर बुरहानपुर कलेक्टर के एक व्यक्ति को जिला बदर करने के आदेश पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई है। जस्टिस विवेक अग्रवाल ने इसे कलेक्टर की जिला मजिस्ट्रेट के अधिकार का दुरुपयोग बताया। मुख्य सचिव से आग्रह किया कि वे कलेक्टरों की बैठक बुलाएं, उन्हें कानून समझाएं और निर्देश दें कि, वे किसी राजनीतिक और बाहरी दबाव में काम न करें।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की क्षतिपूर्ति के लिए 50 हजार का हर्जाना लगाते हुए आदेश दिया, सरकार कलेक्टर से यह राशि वसूलने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर हर हाल में याचिकाकर्ता पर कार्रवाई करना चाहते थे। उन्होंने वन अधिनियम के तहत दर्ज 11 मामलों का रेकॉर्ड भी फाइल में शामिल कराया, जिसका कोई औचित्य नहीं है।
ये है मामला
बुरहानपुर के अंतराम अवासे को बुरहानपुर कलेक्टर ने जनवरी में जिला बदर करते हुए जिले की सीमा में प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी। अवासे ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता पर 2019 और 2022 में एफआइआर दर्ज की गई थी। वह किसी भी मामले में सजायाफ्ता नहीं है। इसके बाद भी राज्य सुरक्षा कानून की मंशा से उलट कलेक्टर ने उसे जिला बदर करने का आदेश पारित किया। इससे लगता है, वे किसी बाहरी शक्ति से प्रभावित थे।

कलेक्टर ने बचाव में भ्रमित करने की कोशिश की…
हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि याचिकाकर्ता पर दो एफआइआर भर हैं। वह किसी मामले में दोषी नहीं पाया गया। फिर भी लोक जीवन के लिए वह कैसे खतरा है। कलेक्टर ने इसके कोई तथ्य नहीं दिए।
कोर्ट ने पाया कि बचाव के लिए कलेक्टर ने भ्रमित करने की कोशिश की। कोर्ट ने उनके बयान पेश करने के निर्देश दिए कि जिन्होंने याचिकाकर्ता से खुद को खतरा बताया था। इस पर कलेक्टर ने यह कहते हुए गुमराह करने की कोशिश की, कि डर से वे बयान देने को तैयार नहीं हुए। कोर्ट ने तब उन गवाहों की सूची पेश करने का आदेश दिया, जिनसे प्रशासन ने संपर्क किया था। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि उनके पास ऐसी कोई सूची नहीं है।
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