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छिंदवाड़ा में बीते दिनों रूह को झंझोड़ देने वाली घटना घटित हुई। जहां परासिया और आसपास के क्षेत्र में 22 बच्चों की जहरीली कफ सिरप पीने से मौत हो गई, तो वहीं अन्य बच्चे पांढुर्णा जिले के हैं। जिनकी भी मौत जहरीले कफ सिरप पीने से हुई है और यह कफ सिरप परासिया के कमिश्नर खोर डॉक्टर ने बच्चों को लिखी थी। मानवीयता की हद तब हुई जब दो बच्चों की मौत के बाद, इस बात का खुलासा हो गया था कि कफ सिरप में कुछ गड़बड़ है। जिससे बच्चों की मौत हो रही है? इसके बावजूद भी कमीशन खोर डॉक्टर लगातार बच्चों को जहरीला कफ सिरप लिखता रहा, और इधर बच्चों की लगातार मौत होती रही। इस दिल दहला देने वाले हादसे ने पूरे देश को झगझोर दिया। आज भी बच्चों के परिवार और उनसे सिंपैथी रखने वाले लोग शोक में है… लेकिन कमिश्नर खोर कथित डॉक्टरों को इससे कोई लेना-देना नहीं है! कमीशनखोरी का ताज़ा मामला जिला अस्पताल के कथित डॉक्टर का सामने आया है… जिसने दवा पर्ची पर दवाई की जगह कोड वर्ड लिखकर उस मेडिकल स्टोर में भेजो जहां उसकी कमिशन फिक्स थी…?

स्टेट डेस्क/ छिन्दवाड़ा- डॉक्टर जैसे सेवा भाव के पेशे को बदनाम करने और पैसा उगाही कर बदनाम करने का काम किया है… जिला अस्पताल में एक कथित डॉक्टर ने तो सारी हदें ही पार कर दी है…! जिसने कमीशन के लिए मरीज को दवा की चिट्ठी पर दवाई लिखने की जगह कोड वर्ड लिखा, साथ में मेडिकल स्टोर का नाम भी लिखा और दे दिया?

सारा मामला जिला अस्पताल की सुबह की स्विफ्ट का बताया जा रहा है जहां सुबह लगभग 10:00 से 5:00 बजे के ड्यूटी समय पर पदस्थ डॉक्टर ने मरीज का चेकअप किया और उसके बाद दवाई की चिट्ठी पर 1 A लिखकर गोला पाडा और उसके नीचे सुरभि मेडिकल स्टोर का नाम लिखकर पर्ची मरीज को थमा दी… अब अंदाज यह लगाइए की 1 ए नाम की ऐसी कौन सी मेडिसिन है..? और किस मर्ज की दवा है..? विचारणीय यह है कि कोड वर्ड में दवाई का नाम लिखना और एक मेडिकल स्टोर का उल्लेख करना, साफ करता है कि जिला अस्पताल में कमिश्नर का खेल किस हद तक चल रहा है…

इंसान की जान की, कोई परवाह नहीं…
ऐसा नहीं है कि छिंदवाड़ा में हर कोई डॉक्टर इस तरह की गतिविधियों में लिप्त है। छिंदवाड़ा में एक दो या तीन नहीं, बल्कि कई डॉक्टर ऐसे हैं जो समाज सेवा के क्षेत्र में अपना उल्लेखनीय सहयोग देते हैं। लेकिन इसके विपरीत कथित डॉक्टर चंद टुकड़ों के लिए अपने जमीर को तो बेच रहे हैं? अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस तरीके से दवाई की चिट्ठी पर दवा की जगह 1 ए लिखकर मेडिकल दुकान का नाम लिखना और वहां मरीज को पहुंचाना, ऐसे में मरीज को क्या पता चलेगा कि कौन सी दवाई डॉक्टर ने लिखी है? मेडिकल स्टोर वाला कौन सी दवाई दे रहा है? इससे स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा? यदि मरीज को इस दवाई के सेवन से कुछ होता है तो वह क्लेम भी नहीं कर पाएगा? स्पष्ट रूप से यह सीधा-सीधा जान के साथ खिलवाड़ है….

KBP NEWS.IN
…जाहिद खान
9425391823

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