स्टेड डेस्क- गतिरोध खत्म करने के लिए बेताब सरकार उम्मीद कर रही थी कि यह प्रस्ताव काम करेगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। गुरुवार को चर्चा के बाद किसान यूनियनों ने कृषि कानूनों को स्थगित करने के सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। गतिरोध खत्म करने के लिए बेताब सरकार उम्मीद कर रही थी कि यह प्रस्ताव काम करेगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकार द्वारा 18 महीने तक कानून को स्थगित करने के प्रस्ताव के पीछे पांच वजह गिनाई जा रही हैं:-
- सुप्रीम कोर्ट का कानूनों को लागू होने से रोकना-12 जनवरी के आदेश में शीर्ष अदालत ने कृषि कानूनों को लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी। ऐसा कम ही होता है कि कोर्ट संसद के बनाए कानून पर रोक लगा दे। कई नेताओं का मानना है कि कोर्ट का पैनल बनाना इस ओर इशारा है कि समाधान जल्द से जल्द हो। कुछ नेता इस तरह कोर्ट की दखल को सही नहीं मान रहे हैं।
- वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कहना है कि सरकार को किसानों के साथ संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए साक्षात्कार में संगठन के सुरेश भैया जी जोशी ने कहा, दोनों पक्षों को समाधान करने के लिए प्रयास करना चाहिए और एक आम राय बनानी चाहिए। कहीं न कहीं संघ का भी मत है कि सरकार किसानों से संवेदनशीलता के साथ पेश नहीं आ रही है। जोशी ने कहा कि किसी भी विरोध का इतना लंबे समय तक चलना अच्छी बात नहीं है। संघ चाहता है कि मुद्दे का जल्द समाधान हो। एक बीजेपी नेता ने बताया कि इसका अर्थ है कि संघ मौजूदा स्थिति से खुश नहीं है। संघ भी नहीं चाहता है कि उसके लोग इस मुद्दे पर बंटें।
- संघ नेतृत्व का कृषि कानूनों पर सरकार को खुला समर्थन न होना बीजेपी के अंदर उन विरोध की आवाजों को मजबूती दे सकता है जिनका मानना है कि सरकार को कानूनों पर अधिक विचार-विमर्श करना चाहिए था।
- 26 जनवरी पर ट्रैक्टर परेड- सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड दिल्ली में होगी कि नहीं ये दिल्ली पुलिस को तय करना है। बीजेपी के एक नेता के मुताबिक सरकार नहीं चाहती है कि 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर मार्च करें। सरकार के लिए ये शर्मिंदगी की बात हो सकती है। इसलिए सरकार जल्द से जल्द मुद्दे का निपटारा चाहती है। अगर किसान परेड करते हैं तो सारा ध्यान किसानों की परेड की ओर ही जाएगा जो कि सरकार नहीं चाहती है।
- 29 जनवरी से बजट सत्र की शुरुआत होनी है। कृषि कानूनों के मुद्दे पर इस दौरान विपक्ष पूरी तरह से सरकार पर हमलावर रहेगा। एक नेता ने बताया, कई पार्टियों ने किसानों को अपना समर्थन दिया है, कृषि कानूनों के मुद्दे पर बीजेपी संसद में अकेली भी पड़ सकती है। विपक्ष के लिए सरकार के खिलाफ एकजुट होने का ये बड़ा मौका साबित हो सकता है। भले ही सरकार के पास बहुमत हो लेकिन सरकार को किसी भी तरह की विपक्षी एकता रास नहीं आएगी।
मध्यप्रदेश के सभी जिला एवं तहसील में संवाददाता हेतु संपर्क करें-9425391823








